शिमला-05 अक्तूबर. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला जिले के जुब्बल और कोटखाई क्षेत्र के देवरीघाट तथा बरियोंघाट गांवों में स्थापित एंटी-हेल (ओलावृष्टि नियंत्रण) गनों के संचालन पर कम से कम एक वर्ष के लिए रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पहले से स्थापित दोनों एंटी-हेल गनों का उपयोग अगले आदेशों तक किसी भी स्थिति में न किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि निजी व्यक्तियों द्वारा भी एंटी-हेल गनों का उपयोग न किया जाए।
अदालत ने पाया कि राज्य सरकार के जवाब के अनुसार देवरीघाट और बरियोंघाट में दो एंटी-हेल गनें स्थापित हैं तथा इनके प्रभावों पर विश्वविद्यालय द्वारा अध्ययन किया जा रहा है, जिसके अंतिम निष्कर्ष आने में अभी लगभग चार वर्ष लगेंगे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बागवानी निदेशक के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि जिन अवसरों पर हेल कंट्रोल सिस्टम एक घंटे से अधिक समय तक संचालित रहा, उस दौरान भारी वर्षा दर्ज की गई। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि एंटी-हेल गनों के उपयोग से बादल अन्य क्षेत्रों की ओर धकेले जाने और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश व ओलावृष्टि होने संबंधी शिकायतों को बल मिलता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी जवाब मांगा है कि एंटी-हेल गनों के संचालन पर रोक लगने के बाद देवरीघाट और बरियोंघाट के आसपास के क्षेत्रों को कोई लाभ हुआ है या नहीं। साथ ही मैक्सिको, रोमानिया और अन्य देशों में ऐसे सिस्टम के कथित दुष्प्रभावों से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
