शिमला-25 अक्टूबर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के प्रांत संघचालक प्रो. (डॉ.) वीर सिंह रांगड़ा ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से पंच परिवर्तन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के कार्य को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि संस्कारवान व्यक्ति, सशक्त परिवार, समरस समाज और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करना है।
प्रो. रांगड़ा ने पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख विषयों—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी एवं स्व-बोध तथा नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता का अर्थ जाति, वर्ग और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर समाज में आत्मीयता एवं समानता स्थापित करना है। पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत जल संरक्षण, पौधारोपण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना आवश्यक है। स्वदेशी एवं स्व-बोध हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और स्वदेशी उत्पादों के प्रति गौरव का भाव सिखाते हैं। नागरिक कर्तव्य प्रत्येक व्यक्ति को अनुशासन, स्वच्छता, कानून के सम्मान और राष्ट्रहित में योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।
कुटुंब प्रबोधन को विशेष महत्व देते हुए उन्होंने कहा कि परिवार भारतीय संस्कृति की मूल इकाई है। आज परिवार लगातार छोटे होते जा रहे हैं और संयुक्त परिवारों की परंपरा कमजोर पड़ रही है। परिवार के सदस्यों के बीच संवाद, आत्मीयता और संस्कारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार मजबूत होगा तो समाज मजबूत होगा और समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र भी सशक्त बनेगा।
प्रो. रांगड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति आज विश्वभर में अध्ययन और शोध का विषय बन चुकी है। विदेशों से शोधकर्ता और अध्ययन दल भारत आकर संघ की शाखाओं, स्वयंसेवकों की दिनचर्या, अनुशासन, संगठनात्मक व्यवस्था तथा सामाजिक सेवा के कार्यों का अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन दल अपने देशों में लौटकर संघ जैसी सामाजिक संगठन प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त करते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार में बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति की प्रबल भावना थी। देश की स्वतंत्रता, समाज की एकता और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के प्रति उनका समर्पण आज भी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 1925 में स्थापित संघ आज अपने शताब्दी वर्ष में समाज संगठन और राष्ट्रसेवा के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए प्रो. रांगड़ा ने कहा कि भारत को आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी शक्तियां भारत में अस्थिरता पैदा करने और सत्ता परिवर्तन के प्रयासों की चर्चा करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे, क्योंकि आज का भारत संगठित, संतुलित, आत्मविश्वासी और शक्तिशाली है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे पंच परिवर्तन को केवल विचार तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दैनिक जीवन, परिवार और समाज में व्यवहार के रूप में अपनाएं।
इस अवसर पर स्वयंसेवकों द्वारा अनुशासित पथ संचलन निकाला गया। कार्यक्रम में संघ के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा सामाजिक एकता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।
