शिमला-25 अक्टूबर. शिमला के प्रसिद्ध मूर्तिकार और कलाकार प्रो. महेश चंद्र सक्सेना ने 92 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। रविवार दोपहर बाद एमसी सक्सेना को अपने आवास पर अचानक आए कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) के कारण उनका निधन हो गया। उनके निधन से शहर का कला समुदाय शोक में है, उन्होंने एक ऐसे कुशल कलाकार को खो दिया है, जिनकी कृतियाँ ‘पहाड़ों की रानी’ (शिमला) की विरासत का अभिन्न हिस्सा बन गई थीं। यहाँ के निवासियों और पर्यटकों की कई पीढ़ियों के लिए, प्रो. सक्सेना की कला केवल गैलरियों या प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं थी। यह शिमला के रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बन गई थी। उनकी सार्वजनिक मूर्तियाँ और भित्ति-चित्र (म्यूरल) पहाड़ों की कहानियाँ कहते थे, जिनमें हिमाचल प्रदेश की सादगी, मेहनत और परंपराओं की झलक मिलती थी। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है ऐतिहासिक ‘रिज’ (Ridge) पर स्थित दौलत सिंह पार्क में बनी ‘हिमबाला’ या ‘पहाड़ी महिला’ की मूर्ति। सिर पर पानी का घड़ा उठाए एक पहाड़ी महिला को दर्शाती यह मूर्ति, पहाड़ी जीवन की शालीनता, सहनशक्ति और सादगी को बखूबी बयां करती है। शिमला के बदलते मौसमों के बीच खड़ी यह मूर्ति, अनगिनत पर्यटकों की तस्वीरों और यादों का एक जाना-पहचाना हिस्सा बन गई है।
प्रो. MC सक्सेना के निधन से शिमला ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिन्होंने शहर की सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।
