शिमला-24 जुलाई. हिमाचल प्रदेश के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षकों की भारी कमी का असर अब तकनीकी शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। केंद्र सरकार के प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) की सख्ती के बाद प्रदेश के विभिन्न आईटीआई में 200 से अधिक यूनिट (क्लासें) बंद कर दी गई हैं। इसके चलते चालू शैक्षणिक सत्र में करीब 4500 से 5000 सीटों पर प्रवेश नहीं हो पाएगा, जिससे हजारों युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के अवसर प्रभावित होंगे। प्रदेश की 131 सरकारी आईटीआई में प्रशिक्षकों के 722 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।
डीजीटी ने प्रशिक्षकों की ई-केवाईसी और पदों की मैपिंग के बाद स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक यूनिट के लिए अलग नियमित प्रशिक्षक होना अनिवार्य होगा। पहले कई संस्थानों में एक ही प्रशिक्षक दो से तीन यूनिटों को संभाल रहा था, लेकिन अब ऐसी व्यवस्था को मान्यता नहीं दी जा रही। इसके परिणामस्वरूप प्रशिक्षक विहीन यूनिटों को बंद करना पड़ा है। सबसे अधिक प्रभावित ट्रेडों में प्लंबर, मोटर मेकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, वायरमैन, वेल्डर, फैशन डिजाइनिंग, पंप ऑपरेटर, कढ़ाई, स्टेनो हिंदी और एम्ब्रॉयडरी शामिल हैं।
इन ट्रेडों की यूनिटें विभिन्न आईटीआई में बंद होने से विद्यार्थियों के लिए विकल्प सीमित हो गए हैं। डीजीटी ने फिलहाल कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक की राहत देकर व्यवस्था को चलाने की अनुमति दी है। इसके बावजूद 200 से अधिक यूनिट बंद हो चुकी हैं। यदि रिक्त पदों पर जल्द भर्ती नहीं हुई तो अगले शैक्षणिक सत्र में 80 प्रतिशत तक ट्रेड प्रभावित हो सकते हैं। इससे कई आईटीआई की कार्यक्षमता और अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। यह संकट केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। ट्रेड बंद होने से उद्योगों को मिलने वाला प्रशिक्षित मानव संसाधन भी प्रभावित होगा। साथ ही करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित मशीनरी, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण अवसंरचना का पूरा उपयोग नहीं हो सकेगा। उधर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में प्रशिक्षकों के 140 पद भरने को मंजूरी दी गई है। डीजीटी से भी छूट देने के लिए पत्राचार जारी है।
आईटीआई में एक ट्रेड के तहत सामान्यतः एक से तीन यूनिट संचालित होती हैं और प्रत्येक यूनिट में 20 से 24 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। डीजीटी के नए मानकों के अनुसार हर यूनिट के लिए अलग प्रशिक्षक की उपलब्धता अनिवार्य है। इसी आधार पर संस्थानों की प्रवेश क्षमता तय की जा रही है। प्रशिक्षक उपलब्ध न होने की स्थिति में संबंधित यूनिट में दाखिले की अनुमति नहीं दी जा रही।
