नई दिल्ली- 25 जुलाई. NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे से पहले लिखा’मैं पिछले चार दशकों से ज्यादा समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं. मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि यह सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है.’मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं. भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ है, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं.
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में नीट पेपर का जिक्र भी किया है. उन्होंने लिखा ‘3 मई को हुई नीट यूजी की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया और पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई. इसके साथ ही अगले साल से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया. इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए. इसके लिए सरकार का समग्र दृष्टिकोण के तहत काम किया गया. इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून को यह परीक्षा पूर्ण हुई.’
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में लिखा ‘पहले ही दिन से, इस पर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा. मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे. किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे. 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली, परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की है. जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ. मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूं. वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं.’
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में लिखा ‘जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. भारत की युवा शक्ति ही इस देश की असली ताकत है. देश की युवा शक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है. जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं. देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री मोदी को भेज दिया है.’।


