शिमला-16 अगस्त. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के रहने वाले भारतीय सेना के मेजर अर्नव बाली को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और वीरता के लिए सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति ने 15 अगस्त 2026 को उन्हें यह प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार प्रदान किया।
मेजर अर्नव बाली ने 8 सितंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के घने जंगलों में चलाए गए एक हाई-रिस्क काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन में असाधारण बहादुरी का परिचय दिया। उस समय वह 9 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) में तैनात थे।
खुफिया सूचना के आधार पर भारतीय सेना की 9 RR और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने जंगलों में छिपे आतंकियों के खिलाफ सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन शुरू किया था। सुरक्षा बलों की टुकड़ियां जैसे-जैसे संदिग्ध ठिकानों के करीब पहुंचीं, छिपे आतंकियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी।
खुफिया सूचना के आधार पर भारतीय सेना की 9 RR और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने जंगलों में छिपे आतंकियों के खिलाफ सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन शुरू किया था। सुरक्षा बलों की टुकड़ियां जैसे-जैसे संदिग्ध ठिकानों के करीब पहुंचीं, छिपे आतंकियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी।
मेजर अर्नव बाली ने भीषण गोलीबारी के बीच अपने जवानों का नेतृत्व सबसे आगे रहकर किया। उन्होंने अदम्य साहस और सामरिक सूझबूझ का परिचय देते हुए घेराबंदी को मजबूत किया और आतंकियों के खतरे को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुठभेड़ के दौरान आतंकियों का सफाया कर दिया गया।
हालांकि, इस भीषण मुठभेड़ में मेजर बाली गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पेट के हिस्से में दो गोलियां लगीं, जबकि एक गोली उनकी रीढ़ की हड्डी में फंस गई। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में उपचाराधीन रहना पड़ा और कई जटिल चिकित्सकीय ऑपरेशनों से गुजरना पड़ा। लंबी चिकित्सा प्रक्रिया के बाद उन्होंने स्वस्थ होकर वापसी की।
मेजर अर्नव बाली के उच्च कोटि के साहस, नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें सेना मेडल (गैलेंट्री) से नवाजा गया है।
मेजर बाली शिमला के प्रतिष्ठित सेंट एडवर्ड्स स्कूल के पूर्व छात्र भी हैं। उनके इस सम्मान से उनके स्कूल के साथ-साथ शिमला शहर और हिमाचल प्रदेश में भी गर्व और खुशी का माहौल है। उनका शौर्य और नेतृत्व युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
