शिमला-04 सितंबर. राज्य शिक्षक पुरस्कार-2026 की अंतिम चयन सूची को लेकर शिक्षकों ने चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। 11 शिक्षकों ने राज्यपाल को प्रतिनिधित्व सौंपकर चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ जांच की मांग की है। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि उनका किसी चयनित शिक्षक के प्रति व्यक्तिगत विरोध नहीं है, बल्कि उनकी आपत्ति चयन प्रक्रिया और नियमों के समान अनुपालन को लेकर है।
प्रतिनिधित्व में आरोप लगाया गया है कि प्रधानाचार्य डाइट शिमला वीरेंद्र चौहान का नाम 29 अगस्त 2025 को साक्षात्कार के लिए जारी शॉर्टलिस्ट सूची में शामिल नहीं था। इसके बावजूद उनका नाम अंतिम राज्य शिक्षक पुरस्कार सूची में आने पर शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि यदि साक्षात्कार चयन प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा था तो बिना शॉर्टलिस्टिंग और साक्षात्कार के चयन किस आधार पर किया गया।
शिक्षकों ने सामान्य और विशेष पुरस्कार श्रेणियों में कथित तौर पर अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने पर भी सवाल उठाया है। उनके अनुसार अधिसूचना में सामान्य क्षेत्र के लिए 16, जनजातीय क्षेत्र के लिए 9 और विशेष पुरस्कार के लिए 6 पुरस्कार निर्धारित थे, यानी कुल 31 पुरस्कार। जबकि अंतिम चयन सूची में कथित रूप से 21 पुरस्कार शामिल हैं। उन्होंने श्रेणीवार पुरस्कारों की संख्या और वितरण का सत्यापन कराने की मांग की है।
प्रतिनिधित्व में यह भी दावा किया गया है कि विशेष पुरस्कार श्रेणी में आवेदन करने वाले सृष्टि शर्मा (जेबीटी), किरण कुमार (डीएम), संजय कुमार नेगी (जेबीटी) और लोकेंद्र सिंह (सीएचटी) को सामान्य श्रेणी में चयनित किया गया। शिक्षकों ने पूछा है कि क्या ऐसा बदलाव मूल अधिसूचना के प्रावधानों के तहत अनुमेय था और क्या सभी आवेदकों पर समान मानदंड लागू किए गए।
एक अन्य आरोप में सृष्टि शर्मा, जेबीटी को दूसरी बार राज्य शिक्षक पुरस्कार दिए जाने के कथित मामले की जांच की मांग की गई है। शिक्षकों के अनुसार अधिसूचना में पूर्व में पुरस्कार प्राप्त कर चुके शिक्षक के दोबारा चयन पर रोक का प्रावधान था।
शिक्षकों ने शॉर्टलिस्ट सूची, साक्षात्कार कार्यवाही, मूल्यांकन पत्रक, श्रेणीवार मेरिट और चयन अथवा गैर-चयन के कारणों की जांच कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड की जांच से पारदर्शिता और नियमों के समान अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रतिनिधित्व पर अंजू लता, सुशील कुमार धीमान, सुमन शर्मा, संजीव मनकोटिया, परवीन कुमारी, राजेश कुमार, संध्या चौहान, लाल चंद, पायल थापा, साधना शर्मा और विवेकानंद के हस्ताक्षर हैं। इसकी प्रतिलिपि शिक्षा मंत्री, सचिव शिक्षा और निदेशक स्कूल शिक्षा को भी भेजी गई है।
