शिमला-27 सितंबर. हिमाचल के किसानों के सामने खाद का संकट खड़ा हो गया है। इस बार किसानों को गेहूं की बिजाई के लिए 12:32:16 खाद नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार की ओर से इस खाद की सप्लाई रोक दी गई है। बताया जा रहा है कि विदेशों से खाद तैयार करने के लिए जरूरी कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। विदेशों में चले युद्ध का असर भी इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। ऐसे में प्रदेश में अब किसानों को हिमफेड के माध्यम से डीएपी और 16:16 खाद उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जा रही है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बिजाई का समय आने वाला है। ऐसे में खाद की किस्म में अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि कहीं वैकल्पिक खाद की उपलब्धता भी मांग के मुकाबले कम न पड़ जाए। अगर बिजाई के समय खाद के लिए किसानों को समितियों और बिक्री केंद्रों के चक्कर काटने पड़े तो इसका सीधा असर बिजाई के समय पर पड़ सकता है।
प्रदेश में हिमफेड के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध करवाई जाती है। 12:32:16 की आपूर्ति नहीं होने की स्थिति में अब डीएपी और 16:16 खाद पर निर्भरता बढ़ेगी।अब किसानों को इन खादों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। किसानों की चिंता यह है कि क्या यह दोनों विकल्प 12-32-16 खाद की तरह असरदार होंगे या नहीं। किसान 12-32-16 खाद के जगह-जगह सोसायटियों में संपर्क कर रहे हैं या वहां के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें यही जवाब मिल रही है कि खाद उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग के अनुसार हिमाचल में गेहूं का क्षेत्रफल 3.24 लाख हेक्टेयर के करीब है। वहीं, जिला कांगड़ा में करीब 90,000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार की जाती है।
उधर,कृषि विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि केंद्र की ओर से 12-32-16 खाद की आपूर्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके विकल्प में डीएपी और 16:16 खाद किसानों को दी जाएगी। डीएपी खाद की कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी और 16:16 खाद की कीमत 2,250 रुपये प्रति बोरी है। इस दोनों खाद की सप्लाई आ रही है और डिमांड के हिसाब के सोसायटियों में पहुंचाई जा रही है।
