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कांगड़ा-29 सितंबर. हिमाचल की राजनीति को मंगलवार को बड़ा झटका लगा है। जिला कांगड़ा से संबंध रखने वाले राजपूत नेता और 5 बार के पूर्व विधायक मेजर विजय सिंह मानकोटिया का निधन हो गया है । वे 87 वर्ष के थे आज सुबह अपने निवास स्थान तियारा में उन्होंने अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया है। मानकोटिया का राजनीतिक करियर चार दशकों से ज़्यादा लंबा रहा है। एक समय मे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह में मंत्री रहे मनकोटिया बाद में वीरभद्र सिंह के ही धुर विरोधी रहे हैं।

कांगड़ा के एक तेज़-तर्रार राजपूत नेता मानकोटिया ने 1982 में कांगड़ा ज़िले के शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना पहला चुनाव जीता था। इसके बाद 1985, 1990, 1993 और 2003 में भी शाहपुर से विधानसभा पहुंचे। अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान वह अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहे। वह कांग्रेस के अलावा जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ चुके थे। 1985 में वे कांग्रेस में शामिल हुए और उसी साल फिर से वही सीट जीती अपने आक्रामक स्वभाव और अचानक भड़कने के लिए पहचाने जाने वाले मनकोटिया को 1995 में वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में शामिल किया गया था। उन्होंने 2007 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा लेकिन हार गए और बाद में कांग्रेस में लौट आए। उन्होंने 2012 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और फिर हार गए। उन्हें हिमाचल पर्यटन बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। कांग्रेस द्वारा टिकट न दिए जाने और केवल सिंह पठानिया को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने 2017 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा। ऐसी अटकलें थीं कि वे आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं, लेकिन वे बीजेपी में शामिल हो गए।

राजनीति में आने से पहले वह भारतीय सेना में मेजर थे और एक्स सर्विसमैन लीग के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी लंबे समय तक संभाल चुके हैं। मानकोटिया राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के अलावा वह एक लेखक भी रहे हैं, उन्होंने द पैटर्न ऑफ डेस्टिनी, टर्मोइल और अपहीवल जैसी पुस्तकों की रचना की । उनके निधन पर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ राजेश शर्मा ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

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