शिमला-30 सितंबर.राज्य में सरकारी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मार्च और सितंबर महीने के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र पाने वाले कर्मचारियों को अब जॉइनिंग के बीच की अवधि को लेकर पहले जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश के कार्मिक विभाग ने 28 सितंबर 2026 को नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत यदि किसी कर्मचारी को मार्च या सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी होता है और वह अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 अप्रैल या 1 अक्टूबर को अथवा नियुक्ति पत्र में निर्धारित अवधि के भीतर सेवा में शामिल हो जाता है, तो नियुक्ति और कार्यभार संभालने के बीच के समय को नियमितीकरण की पात्रता के लिए माफ माना जाएगा।
इससे पहले 6 अप्रैल 2022 को जारी निर्देशों में ऐसी परिस्थितियों को लेकर प्रावधान किया गया था, जब मार्च या सितंबर के अंतिम कार्य दिवस पर नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद छुट्टियों के कारण कर्मचारी उसी महीने कार्यभार नहीं संभाल पाता था। हालांकि, अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी होने और उसके बाद अगले महीने की पहली तारीख को कर्मचारी के कार्यभार संभालने की स्थिति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी।
इसी मामले में उच्च न्यायालय के ‘सपना कुमारी व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार’ मामले में 22 जुलाई 2025 को दिए गए फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। सरकार ने इसी फैसले के अनुपालन में अब संशोधित निर्देश जारी किए हैं।
नए निर्देशों के अनुसार मार्च या सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र पाने वाला कर्मचारी यदि 1 अप्रैल या 1 अक्टूबर, अथवा नियुक्ति पत्र में निर्धारित कार्यभार ग्रहण करने की समय सीमा के भीतर सेवा में शामिल होता है, तो नियुक्ति पत्र जारी होने और जॉइनिंग के बीच का समय नियमितीकरण के उद्देश्य से माफ माना जाएगा। खास बात यह है कि इस व्यवस्था में बीच की अवधि में सरकारी अवकाश रहा हो या नहीं, इससे पात्रता पर असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने नियमितीकरण की पात्रता तय करने के लिए कट-ऑफ तारीख को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। इसके लिए नियुक्ति आदेश जारी होने की तारीख अथवा मार्च या सितंबर का अंतिम दिन, जो भी बाद में हो, उसे आधार माना जाएगा। इससे उन कर्मचारियों को नियमितीकरण की पात्रता की गणना में राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिन्हें महीने के अंतिम दिनों में नियुक्ति मिली थी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जॉइनिंग और नियमितीकरण की पात्रता में राहत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी को पीछे की तारीख से सभी वित्तीय लाभ मिलेंगे। वास्तविक वित्तीय लाभ वास्तविक जॉइनिंग की तारीख या विभाग की ओर से जारी नियमितीकरण आदेश की प्रभावी तारीख से ही देय होंगे। नए निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन मामलों का पहले ही अंतिम रूप से निपटारा हो चुका है, उन्हें नए आदेश के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। वहीं, कार्मिक विभाग की ओर से 6 अप्रैल 2022 को जारी पिछला आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा।
