शिमला-16 अक्टूबर. हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी और निजी स्कूलों में नर्सरी से पहली कक्षा तक दाखिले के लिए आयु सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, बालवाटिका-1 (नर्सरी) में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 3 वर्ष, बालवाटिका-2 (एलकेजी) के लिए 4 वर्ष, बालवाटिका-3 (यूकेजी) के लिए 5 वर्ष और पहली कक्षा के लिए 6 वर्ष पूरी होनी चाहिए। यह आयु संबंधित शैक्षणिक सत्र के 30 सितंबर तक पूरी होनी अनिवार्य है।
शिक्षा विभाग के 13 अक्तूबर, 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ये आयु मानदंड हिमाचल प्रदेश के सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होंगे। इनमें निजी स्कूल भी शामिल हैं। यह स्पष्टीकरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रवेश आयु संबंधी नियमों को लेकर जारी किया गया है।
न्यूनतम आयु से अधिक होने पर प्रवेश से नहीं किया जा सकेगा वंचित
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित आयु मानदंड प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु तय करते हैं, न कि अधिकतम आयु। ऐसे में यदि किसी बच्चे की आयु बालवाटिका-1 के लिए 4 वर्ष, बालवाटिका-2 के लिए 5 वर्ष या बालवाटिका-3 के लिए 6 वर्ष पूरी हो चुकी है, तो अभिभावक की मांग पर उसे संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकता है। केवल निर्धारित न्यूनतम आयु से अधिक होने के आधार पर बच्चे का दाखिला रोका नहीं जा सकेगा।
शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित स्कूलों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आदेशों का उल्लंघन होने पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), हिमाचल प्रदेश आरटीई नियम, 2025 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार के इस स्पष्टीकरण से प्रवेश प्रक्रिया में आयु को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होने और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
