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शिमला-22 अक्टूबर. शिमला के पूर्व एसएसपी के खिलाफ थाना सदर में आपराधिक मामला दर्ज हुआ है. शिमला पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है. उधर आरोपित अधिकारी ने पूरे मामले पर अभिज्ञता जताई है. शिमला में मीडिया को जारी सूचना के अनुसार पुलिस थाना सदर, शिमला के अंतर्गत तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शिमला संजीव कुमार गांधी के विरुद्ध एक पुलिस कांस्टेबल के साथ कथित धोखाधड़ी तथा सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार पुलिस लाइन कैथू शिमला में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उन्हें सरकारी कार्यों और इंतजामों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसके लिए उनको अपनी जेब से खर्चा करके उन्हें बाद में भुगतान करने के लिए आश्वस्त किया गया था।इस पर उन्होंने व्यवस्थाओं को पूरा करने के लिए अपनी जेब से कुल ₹1,87,890 खर्च करके सभी साजो सामान के इंतजाम किए थे।उसके बाद उन्होंने संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए, जिनको कार्यालय द्वारा जांच के बाद भुगतान के लिए स्वीकृत कर दिया गया था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने उन्हें अपने पास बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर धोखे से हस्ताक्षर करवाए। उन्हें बताया गया कि ये हस्ताक्षर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक हैं और स्वीकृत राशि उन्हें मिल जाएगी। जबकि, हस्ताक्षर करवाने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया।
जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद जब शिकायतकर्ता ने कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से जानकारी प्राप्त की, तो उन्हें पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके खाते में जमा नहीं हुई। जिसके चलते शिकायतकर्ता को उनकी स्वीकृत राशि से वंचित रहना पड़ा और उन्हें अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से धन की व्यवस्था करनी पड़ी।
शिमला पुलिस के मुताबिक
शिकायत मिलने के बाद संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जिला पुलिस के एक फंड से लगभग दो वर्षों के दौरान कुल ₹2,35,000 की अवैध निकासी की गई थी। आरोप है कि उक्त राशि का उपयोग तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी द्वारा किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है, जिससे फंड में धन की कमी उत्पन्न हो गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, जब संजीव कुमार गांधी का स्थानांतरण एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में हुआ, तो आरोप है कि फंड में हुई कमी को पूरा करने के लिए आनन-फानन में उन्होंने शिकायतकर्ता के बिलों की स्वीकृत राशि को शिकायतकर्ता को धोखे में रखकर उस राशि को निकालकर शिकायतकर्ता को देने के बजाय संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दिया। इस कारण शिकायतकर्ता को उनकी स्वीकृत राशि का भुगतान नहीं हुआ और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। फण्ड से निकाली गई धनराशि के खर्च संबंधी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
शिमला के एसएसपी ने बताया कि प्रथम दृष्टया, रिकॉर्ड की जांच में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और स्वीकृत राशि को अन्य खाते से निकाली गई राशि की जगह स्थानांतरित किए जाने से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं के तथ्य सामने आए।

इन तथ्यों के आधार पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, जिला शिमला, संजीव कुमार गांधी के विरुद्ध पुलिस थाना सदर, शिमला में अभियोग संख्या 138/2026 दिनांक 22.10.2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 एवं 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, बेईमानी से धन का इस्तेमाल करने तथा जाली दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने से संबंधित हैं। मामले की जांच जारी है।

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