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शिमला-03अगस्त.बरसात के मौसम में पनपने वाले संक्रमण स्क्रब टायफस ने दस्तक दे दी है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस की जांच हेतु कुल सोमवार को 09 नमूनों का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार 02 मरीजों में स्क्रब टायफस संक्रमण की पुष्टि (पॉजिटिव) हुई है, जबकि 07 नमूनों की रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई। आज तक कुल 38 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 03 मरीज स्क्रब टायफस पॉजिटिव पाए गए हैं।
स्क्रब टायफस से बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। यह बीमारी संक्रमित माइट (चिगर) के काटने से फैलती है और विशेष रूप से खेतों, झाड़ियों तथा जंगलों वाले क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को अधिक जोखिम रहता है। बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द या अन्य संबंधित लक्षण दिखाई देने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवाएं। समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज संभव है। स्क्रब टायफस से हर साल औसतन 15 से 20 मौतें होती हैं।

डॉ. राहुल राव एमएस इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, शिमला ने बताया कि इस संक्रमण के लक्षण और पहचान तेज बुखार और ठंड लगना, सिरदर्द और मांसपेशियों में तेज दर्दशरीर पर चकत्ते या काटने वाली जगह पर काला निशान (Eschar) बन जाना है।

इससे बचाव के लिए खेतों, बगीचों या लंबी घास के पास जाते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े (पूरी बाजू की कमीज और लंबे पेंट) पहनें।खेतों से लौटने के बाद तुरंत साबुन से स्नान करें और कपड़े बदल लें। झाड़ियों और चूहों की रोकथाम के लिए आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें।यदि आपको या आपके किसी परिचित को तेज बुखार या शरीर में दर्द जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाएं जहां इसकी जांच और दवा मुफ्त उपलब्ध है।

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