शिमला-11अगस्त. मॉनसून के मौसम में मंगलवार को जगह जगह दर्दनाक घटनाएं घटित हुई। एक ओर कुल्लू जिला के आनी में कार पर पहाड़ी टूटी जिसमें दो लोग घायल हुए दूसरी ओर भराड़ीघाट के पास एक कार पर चट्टान गिरने से एक की मौत हो गई। मंगलवार को शिमला-धर्मशाला नेशनल हाइवे पर भराड़ीघाट के दसेरन में चलती कार पर पहाड़ी से चट्टान गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हो गए। हादसा दाड़लाघाट थाना क्षेत्र में हुआ। मृतक की पहचान शिमला निवासी कारोबारी अनिल बख्शी (61) के रूप में हुई है। जिस जगह हादसा हुआ, वहां फोरलेन का निर्माण कार्य भी चल रहा है। लगातार बारिश के बीच पहाड़ों से अचानक पत्थर और मलबा गिरने की घटनाओं ने सड़क पर सफर को जोखिम भरा बना दिया है।
बारिश और भूस्खलन से प्रदेश के सड़क नेटवर्क पर भी बड़ा असर पड़ा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की शाम की रिपोर्ट के अनुसार दो नेशनल हाईवे और 204 सड़कें बंद हैं। मंडी में एनएच-154 और एनएच-21 समेत 80 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 56, सिरमौर में 23, चम्बा में 16 और शिमला में 14 सड़कें अवरुद्ध हैं। कुल्लू की पार्वती घाटी में भूस्खलन से मणिकर्ण-बरशैणी सड़क भी बंद हो गई है। घटीगढ़ के पास पहाड़ी से बार-बार मलबा गिर रहा है। इससे इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है। सड़कें बंद होने के बाद लोक निर्माण विभाग की टीमें बहाली के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश से कई जगह काम में दिक्कत आ रही है।
बारिश और भूस्खलन का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। प्रदेश में 45 बिजली ट्रांसफार्मर बंद हैं। अकेले सिरमौर के नाहन में 41 ट्रांसफार्मर ठप हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। पेयजल व्यवस्था में शिमला जिले की 24 और सिरमौर की 31 योजनाएं बंद हैं। प्रदेश में कुल 82 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इस बीच शिमला में मंगलवार को जोरदार बारिश हुई और प्रदेश के कई दूसरे हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रहा। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।
30 जून से शुरू हुए मॉनसून सीजन में अब तक प्रदेश में 163 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सड़क हादसों में 93 लोगों की जान गई है। भूस्खलन से 14, फ्लैश फ्लड से एक, बहने से चार और करंट लगने से छह लोगों की मौत हुई है। पहाड़ी से फिसलने और पेड़ से गिरने की घटनाओं में 23 लोगों की जान गई है। मॉनसून के दौरान अब तक 67 कच्चे-पक्के मकान पूरी तरह ढह चुके हैं और 268 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। 14 दुकानें और 226 पशुशालाएं भी धराशायी हुई हैं। प्रदेश में 30 जून से अब तक करीब 910 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। इसमें लोक निर्माण विभाग को करीब 686 करोड़ और जल शक्ति विभाग को करीब 203 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया है। 12 अगस्त को चम्बा, कांगड़ा और मंडी में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 13 अगस्त को बिलासपुर, चम्बा, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा। 14 अगस्त को मौसम ज्यादा खराब रहने की संभावना है। इस दिन सिरमौर में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 15 अगस्त को कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और लाहौल-स्पीति में येलो अलर्ट रहेगा। 16 और 17 अगस्त को भी कुछ जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के पास जाने, तेज बहाव वाले पानी को पार करने और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा करने से बचने की अपील की है।
