सुन्नी-11अगस्त. सततलुज नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा होने के कारण शिमला और मंडी जिले की सीमा पर स्थित दर्जनों गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। ग्राम पंचायत शकरोडी के प्रधान यशपाल शर्मा ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार और संबंधित जलविद्युत कंपनियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां हमारे आज के मौन के लिए हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
यशपाल शर्मा ने कहा कि सतलुज नदी के रौद्र रूप और लगातार जमा हो रही गाद के कारण कई क्षेत्र सीधे तौर पर विनाश के मुहाने पर खड़े हैं जिसमें ग्राम पंचायत शकरोडी, ग्राम पंचायत शाकरा, नगर पंचायत सुन्नी, ग्राम पंचायत थलीग्राम,ग्राम पंचायत घरयाना, ग्राम पंचायत तत्तापानी, ग्राम पंचायत जूनीग्राम, ग्राम पंचायत मढोड़घाट का क्षेत्र खतरे में है।
प्रधान ने कहा कि नदी में गाद का स्तर लगातार ऊपर उठ रहा है। इसके कारण हमारे पूर्वजों की जमीनें, उपजाऊ खेत, ऐतिहासिक स्थल और स्थानीय बुनियादी ढांचा (Assets) धीरे-धीरे जलमग्न और नष्ट होते जा रहे हैं। पर्यावरण और स्थानीय आजीविका को जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और कंपनी को चेतावनी दी है कि सरकार और मुनाफा कमाने वाली कंपनियां गहरी निद्रा में सोई हैं। वे इस तबाही को मूकदर्शक बनकर देख रही हैं। हमारी जमीनों और पानी से अरबों का राजस्व कमाने वाले संस्थान आज स्थानीय जनता को बेघर होने के लिए छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम आज भी चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ी हमें कोसेगी। हमारे बच्चे कहेंगे कि जब हमारी मातृभूमि और धरोहरें डूब रही थीं, तो हमारे पूर्वजों ने आवाज क्यों नहीं उठााई? वे हमारे आत्मसमर्पण पर आंसू बहाएंगे।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि सभी क्षेत्र को बचाने के लिए एकजुट हो जाएं और विरोध दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांग पर ध्यान नहीं देती है तो क्षेत्र के सभी लोग सड़कों पर उतरेगी।
