शिमला-02 सितंबर. शिमला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. यश पाल रांटा ने लोगों को सलाह दी है कि वे मॉनसून के मौसम में स्क्रब टाइफस को लेकर सतर्क रहें। उन्होंने बताया कि मौजूदा मॉनसून सीज़न में अब तक शिमला ज़िले में स्क्रब टाइफस के 24 कन्फर्म मामले सामने आए हैं।
स्क्रब टाइफस संक्रमित लार्वा माइट्स (एक तरह के छोटे कीड़े) के काटने से फैलता है, जो आमतौर पर झाड़ियों, घास, खेतों और घनी वनस्पति वाले इलाकों में पाए जाते हैं। इसके आम लक्षणों में बुखार, तेज़ सिरदर्द, शरीर में दर्द, कंपकंपी, कमज़ोरी, रैशेज़ और लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं। कुछ मामलों में ‘एस्चर’ (eschar) नाम का गहरे रंग का घाव या पपड़ी जैसा निशान भी हो सकता है।
जनता के लिए सलाह
लोगों को सलाह दी जाती है कि वे:
– घास या ज़मीन पर सीधे बैठने या लेटने से बचें।
– खेतों या घनी वनस्पति वाले इलाकों में काम करते समय पूरी आस्तीन के कपड़े, लंबी पतलून और पूरे पैर ढंकने वाले जूते पहनें।
– घर के आस-पास घास, खरपतवार और झाड़ियों को छोटा या साफ़ रखें।
– घर के अंदर और आस-पास साफ़-सफ़ाई बनाए रखें।
– खेतों या घनी वनस्पति वाले इलाकों में काम करने के बाद नहाएं और कपड़े बदलें या धोएं।
– खुद से दवा लेने से बचें और अगर बुखार बना रहे तो डॉक्टर की सलाह लें।
शुरुआत में पता चलने पर स्क्रब टाइफस का इलाज संभव है। अगर किसी को लगातार बुखार, तेज़ सिरदर्द, शरीर में दर्द या बीमारी के अन्य लक्षण महसूस हों, तो बिना देरी किए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं। ज़िले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रब टाइफस के इलाज के लिए दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और उसने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निगरानी बनाए रखने और मामलों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
