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शिमला-09 सितंबर. शिमला के कालरा कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखा से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब दो करोड़ रुपए का ऋण लेने और बैंक को 2.11 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। बैंक के शाखा प्रमुख एवं मुख्य प्रबंधक किरण कुमार करपलेम की शिकायत पर पुलिस थाना सदर शिमला में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) , 336 (3) , 340 (2) , 316 (5) और 61(2) के तहत जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी शिकायत अनुसार, रामपुर निवासी अभिजीत लाल, जो एम/एस शॉपर्स ललसन बुटीक के मालिक बताए गए हैं, ने अपने कारोबार के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक से दो ऋण सुविधाएं ली थीं। इनमें करीब एक करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट और एक करोड़ का टर्म लोन शामिल था। ऋण के लिए आरोपी ने सप्लायरों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी बिल और अन्य दस्तावेज तैयार कर बैंक में जमा करवाए। मामले में रामपुर स्थित दुकान से संबंधित कथित फर्जी लीज डीड भी सामने आई है।
मकान मालिक के हस्ताक्षर निकले फर्जी
बैंक अधिकारियों के अनुसार, ऋण के लिए प्रस्तुत किए गए किरायानामे पर मकान मालिक के हस्ताक्षर कथित तौर पर फर्जी पाए गए। शिकायत के अनुसार, मौके पर दुकान बंद मिली और वहां रखा सामान भी कथित तौर पर हटा दिया गया था। इससे बैंक के संदेह और बढ़ गए। बैंक के अनुसार, आरोपी का ऋण खाता रिजर्व बैंक के निर्धारित मानकों के तहत एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित किया जा चुका है। बैंक ने बताया कि 26 अप्रैल,2026 तक ब्याज और अन्य खर्च सहित करीब 2.11 करोड़ रुपए की राशि वसूल की जानी थी
संपत्तियों की छानबीन
बैंक के लिए ऋण के बदले हाइपोथिकेटेड संपत्तियों का सत्यापन करना मुश्किल रहा। बैंक को संदेह है कि ऋण के रूप में प्राप्त राशि का इस्तेमाल उस उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। फिलहाल सदर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कथित फर्जी दस्तावेजों, ऋण लेने की प्रक्रिया, बैंक में जमा करवाए गए बिलों, लीज डीड, ऋण राशि के इस्तेमाल और संबंधित संपत्तियों की जांच की जा रही है।

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