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केलांग-09 सितंबर. जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक आज उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष, केलांग में उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिले में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, संरक्षण और उनके अधिकारों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

बैठक में मिशन वात्सल्य के तहत पहली तिमाही में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना, जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक एवं सामाजिक सहायता, बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था, विशेष किशोर पुलिस इकाई, पॉक्सो कानून तथा बाल संरक्षण से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई।

इस दौरान जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल देखभाल संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों से जुड़े मामलों को पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और जरूरतमंद बच्चों तक सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ समय पर पहुंचाया जाए।

उपायुक्त किरण भड़ाना ने बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल बैठकें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बैठक में लिए गए निर्णयों पर समयबद्ध कार्रवाई और उसकी नियमित समीक्षा भी जरूरी है।

उन्होंने हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जिले में प्रवासी मजदूरों के बच्चों की पहचान कर उनका स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को आर्थिक, सामाजिक या अन्य कारणों से शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। इस कार्य के लिए बाल कल्याण समिति, पुलिस, शिक्षा विभाग तथा संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने बीआरओ, लोक निर्माण विभाग और कृषि क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को लेकर भी विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों से समन्वय कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि इन क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के बच्चों को स्कूल जाने का अवसर मिल रहा है और उनका दाखिला तथा पढ़ाई नियमित रूप से जारी है।

बैठक में बच्चों से मजदूरी करवाने पर रोक को लेकर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने ढाबों, होटलों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बाल श्रम की रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी एवं जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिष्ठानों में ‘यहां बाल श्रम नहीं कराया जाता’ संबंधी प्रमाण-पत्र अथवा घोषणा प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करवाना सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाले पॉक्सो कानून के बारे में विद्यालयों और अन्य संबंधित स्थानों पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी सरल भाषा में दी जानी चाहिए, ताकि वे किसी भी असहज या अनुचित परिस्थिति में बिना डर के मदद मांग सकें।

उन्होंने विद्यालयों में नियमित निरीक्षण और बच्चों की काउंसलिंग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ विकास का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इसलिए बच्चों के मानसिक, सामाजिक, शारीरिक और शैक्षणिक विकास पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने जिले के विद्यालयों में स्कूलों की सुविधाओं और कमियों का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, शिक्षण संसाधनों, खेल सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से बेहतर बनाया जाए। लक्ष्य यह होना चाहिए कि जिले के विद्यालयों को हर दृष्टि से बेहतर और आदर्श विद्यालय बनाया जा सके।

उन्होंने बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वस्थ और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए विद्यालयों और समुदाय स्तर पर नियमित खेल प्रतियोगिताएं एवं अन्य गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

उपायुक्त ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और समग्र विकास जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी विभागों से आपसी समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिले के लिए जो विषय सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लेकर ठोस और परिणाम देने वाली कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों का धन्यवाद करते हुए बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर सहयोग और समन्वय बनाए रखने की अपील की।
इस बैठक में एसडीएम कुनिका ऐकर्स, परियोजना अधिकारी अश्वनी कुमार, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष शशि किरण, जिला बाल सरंक्षण अधिकारी डॉ हीरानंद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एम. के. गाँधी, छेरिंग डोलमा बाल कल्याण समिति सदस्य, बाल कल्याण समिति सदस्य हीरा लाल, जिला पंचायत अधिकारी संजय कुमार सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

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