शिमला-10 सितंबर. आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद जिला शिमला को नया जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष मिल ही गया। शिमला जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन पद के चुनाव में भाजपा ने 26 साल बाद जिला परिषद की सत्ता पर कब्जा कर लिया है। वीरवार को हुए जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुनाव पद पर भूपेंद्र सिसोदिया ने जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा वाइस चेयरमैन चुने गए। क्लांटा ने चुनाव में भाजपा को समर्थन दिया था। इसके बाद भाजपा ने उन्हें वाइस चेयरमैन पद के लिए समर्थन देकर जिला परिषद में सत्ता का समीकरण अपने पक्ष में कर लिया। अध्यक्ष पद के चुनाव में भूपेंद्र सिसोदिया को 13 वोट मिले, जबकि कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र रेटका को 10 मत प्राप्त हुए। इस दौरान दो मत रिजेक्ट हुए। 13 वोट के साथ सिसोदिया ने अध्यक्ष पद के लिए जरूरी बहुमत हासिल कर लिया और जीत दर्ज की।वहीं वाइस चेयरमैन पद का मुकाबला भी दिलचस्प रहा। निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा को 14 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी मीनाक्षी को 10 मत प्राप्त हुए। एक मत रिजेक्ट हुआ। क्लांटा की जीत के साथ ही भाजपा समर्थित खेमे को जिला परिषद में दूसरा बड़ा पद भी मिल गया।
इस चुनाव की सबसे अहम बात यह रही कि भरत सिंह क्लांटा निर्दलीय सदस्य के तौर पर चुनाव जीते थे और उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया था। अब भाजपा ने उन्हें वाइस चेयरमैन पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इस तरह निर्दलीय सदस्य का समर्थन भाजपा के लिए जिला परिषद में सत्ता हासिल करने में निर्णायक साबित हुआ।शिमला जिला परिषद के लिए यह चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि करीब 26 साल बाद भाजपा को जिला परिषद की कमान मिली है। लंबे समय से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान का आखिरकार पटाक्षेप हो गया।
अब भूपेंद्र सिसोदिया के नेतृत्व में जिला परिषद का कामकाज आगे बढ़ेगा, जबकि भरत सिंह क्लांटा उपाध्यक्ष के रूप में उनका साथ देंगे। दोनों पदों पर नए नेतृत्व के साथ जिला परिषद में विकास कार्यों और लंबित मुद्दों को गति देने की चुनौती भी होगी। कुल मिलाकर शिमला जिला परिषद के चुनाव में भाजपा ने अध्यक्ष पद अपने नाम किया, जबकि निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा का समर्थन हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर भी अपना प्रभाव कायम कर लिया।
