शिमला-26 अक्टूबर. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य विद्युत बोर्ड में रोस्टर नियमों का उल्लंघन कर जूनियर कर्मचारी को दी गई पदोन्नति को रद्द करते हुए मृतक कर्मचारी नगेंद्र सिंह को 27 जुलाई 2015 से पदोन्नत मानने के आदेश दिए हैं। अदालत ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि नगेंद्र सिंह के कानूनी वारिसों को इस पदोन्नति के आधार पर मिलने वाले वित्तीय और अन्य सेवालाभ दिए जाएं। न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज ने मामले की सुनवाई के बाद कनिष्ठ कर्मचारी को फोरमैन (विशेष) के पद पर पदोन्नति देने का आदेश रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मॉडल रोस्टर के नियमों का पालन नहीं करने से रोस्टर व्यवस्था का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अदालत ने बिजली बोर्ड की ओर से अपनाई गई पदोन्नति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप नहीं पाया। मामले में बोर्ड ने कनिष्ठ कर्मचारी को फोरमैन (विशेष) के पद पर पदोन्नत किया था, जबकि नगेंद्र सिंह का दावा था कि वरिष्ठता और लागू रोस्टर के अनुसार उन्हें इस पद पर पदोन्नति मिलनी चाहिए थी।
मामले के अनुसार नगेंद्र सिंह को 14 नवंबर 1985 को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में ऑयल एंड क्लीनर के पद पर नियमित नियुक्ति मिली थी। जनवरी 1989 में उन्हें इलेक्ट्रीशियन के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद अगस्त 2005 में वह फोरमैन बने। बोर्ड के नियमों के अनुसार, फोरमैन के पद पर आठ वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी फोरमैन (विशेष) के पद पर पदोन्नति के पात्र थे।
फोरमैन (विशेष) के पदों पर पदोन्नति के लिए बोर्ड ने 13 पदों तक के कैडर के लिए मॉडल रोस्टर अपनाया था। अदालत के सामने आए तथ्यों के अनुसार 1 जनवरी, 2015 की वरिष्ठता सूची में नगेंद्र सिंह दूसरे स्थान पर थे। उस समय फोरमैन (विशेष) के दो पद रिक्त थे और 4 अप्रैल, 2015 को पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हुई थी।
बोर्ड ने इसके बाद 11 मई और 27 जुलाई, 2015 को दो कर्मचारियों को फोरमैन (विशेष) के पद पर पदोन्नत किया। इनमें 27 जुलाई, 2015 को पदोन्नत किया गया कर्मचारी वरिष्ठता सूची में नौवें स्थान पर था। नगेंद्र सिंह ने इस पदोन्नति को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया। उनका कहना था कि बोर्ड ने मॉडल रोस्टर का सही तरीके से पालन नहीं किया और उनकी पदोन्नति के दावे पर विचार नहीं किया।
बोर्ड ने अदालत में दलील दी कि संबंधित कर्मचारी को आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित रोस्टर बिंदु के अनुसार पदोन्नति दी गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि चौथे चक्र में छठे पद तक की प्रक्रिया पूरी किए बिना पांचवें चक्र को लागू नहीं किया जा सकता था। मॉडल रोस्टर में निर्धारित प्रक्रिया को छोड़कर अगले चक्र में जाने से रोस्टर व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता है।
अदालत ने 27 जुलाई, 2015 को जारी पदोन्नति आदेश को रद्द कर दिया और बिजली बोर्ड को नगेंद्र सिंह को उसी तारीख से फोरमैन (विशेष) के पद पर पदोन्नत मानने के निर्देश दिए। इस पदोन्नति के आधार पर उनकी वरिष्ठता, वेतन वृद्धि, आगे की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों की गणना की जाएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य था कि नगेंद्र सिंह का 28 मई 2021 को निधन हो चुका है। इसके बाद उनकी पत्नी कमला देवी और बेटे अरुण कुमार को मामले में कानूनी वारिस के रूप में शामिल किया गया था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पदोन्नति से संबंधित लाभ उनके कानूनी वारिसों को जारी किए जाएं।
अदालत ने बोर्ड को आवश्यक कार्रवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि निर्धारित अवधि में पदोन्नति के बकाया वित्तीय लाभ जारी नहीं किए जाने पर उन पर आदेश की तारीख से भुगतान होने तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देय होगा। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित पदोन्नति आदेश को रद्द कर दिया।
