शिमला,30 अक्टूबर. मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला के ऐतिहासिक वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के संचालन और प्रबंधन के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो राज्य के वित्तीय इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
इस प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश सरकार को देने की रिकॉर्ड बोली प्राप्त हुई है, जिसे इस तरह के लेन-देन में देश में अब तक की सबसे बड़ी राजस्व हिस्सेदारी माना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत 35 वर्षों की लाइसेंस अवधि में राज्य को प्रतिमाह लगभग 3 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है, जिसमें हर साल 3 प्रतिशत की वृद्धि होगी और इस पूरी अवधि के दौरान कुल लगभग 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इसके साथ ही, समझौते के तहत 24 करोड़ रुपये की अग्रिम लाइसेंस फीस और होटल की संपत्ति के उन्नयन के लिए 50 करोड़ रुपये के न्यूनतम निवेश की प्रतिबद्धता भी सुनिश्चित की गई है।
यह पूरी सफलता लगभग 25 वर्षों से चले आ रहे एक लंबे और जटिल कानूनी विवाद के सफलतापूर्वक समाप्त होने के बाद मिली है। सर्वोच्च न्यायालय में चली न्यायिक कार्यवाही के बाद इस प्रतिष्ठित होटल की संपत्ति प्रदेश सरकार को वापस मिल गई, जिससे सरकार ने होटल की भूमि, संपत्ति, संयुक्त उद्यम कंपनी और उससे जुड़ी सभी परिसंपत्तियों पर पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस कानूनी विजय के परिणामस्वरूप प्रदेश सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपये की नकद राशि भी प्राप्त हुई है।
इस पूरी प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार प्रदेश के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राज्य के संसाधनों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना और जेएसडब्ल्यू से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार हर महत्वपूर्ण परियोजना में हिमाचल के हितों को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। वाइल्ड फ्लावर हॉल का नियंत्रण वापस पाना, रिकॉर्ड राजस्व जुटाना और दीर्घकालिक वित्तीय लाभ सुनिश्चित करना सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करने तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
