हमीरपुर,02 नवंबर. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA) के हिमाचल प्रदेश चैप्टर ने, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) हमीरपुर के आर्किटेक्चर विभाग के सहयोग से, 2026–2028 कार्यकाल के लिए अपनी नवनिर्वाचित कार्यकारी समितियों का पदग्रहण समारोह आयोजित किया। इसके साथ ही “पहाड़ी शहर – बड़ी जिम्मेदारियां” विषय पर एक राज्य-स्तरीय सम्मेलन भी रखा गया।
इस कार्यक्रम में NIT हमीरपुर के निदेशक, डॉ. हीरालाल मुरलीधर सूर्यवंशी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों में NIT हमीरपुर की रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना संतोष ननोटी और IIA की राष्ट्रीय परिषद की कार्यकारी समिति के सदस्य, आर्किटेक्ट नंद लाल चंदेल मौजूद थे। साथ ही, IIA हिमाचल प्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष, आर्किटेक्ट मनुज शारदिया भी उपस्थित रहे।
IIA की तीनों इकाइयों के नवनिर्वाचित नेतृत्व को 2026–28 के कार्यकाल के लिए औपचारिक रूप से पदभार सौंपा गया। आर्किटेक्ट मनुज शारदिया हिमाचल प्रदेश चैप्टर का नेतृत्व करेंगे, आर्किटेक्ट रंजीत कनौजिया धर्मशाला केंद्र के प्रमुख होंगे, और आर्किटेक्ट राजीव शर्मा शिमला केंद्र का नेतृत्व करेंगे। नई टीमों ने आर्किटेक्चर समुदाय को मजबूत करने, पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, युवा आर्किटेक्ट्स और छात्रों को प्रोत्साहित करने, तथा सरकारी संस्थानों और स्थानीय प्राधिकरणों के साथ जुड़ाव बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
सम्मेलन के दौरान “पहाड़ी शहर – बड़ी जिम्मेदारियां” विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा हुई, जिसका संचालन SJVNL के HOD (MIS) श्री अजय शर्मा ने किया। इस पैनल में धर्मशाला नगर निगम के आयुक्त और स्मार्ट सिटी धर्मशाला के CEO जफर इकबाल (IAS); HPPWD के मुख्य आर्किटेक्ट और काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के सदस्य आर्किटेक्ट राजीव शर्मा; HPRERA के सदस्य आर्किटेक्ट विदुर मेहता; और हिमाचल प्रदेश के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के स्टेट टाउन प्लानर प्रदीप ठाकुर शामिल थे।
इस चर्चा में हिमालयी शहरी बस्तियों के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें अनियोजित शहरीकरण, नाजुक पारिस्थितिकी (ecology), ढलानों की स्थिरता, बुनियादी ढांचा, आवागमन, पर्यटन का दबाव, जलवायु के प्रति लचीलापन और विरासत संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल थे। पैनल ने इस बात पर जोर दिया कि पहाड़ी शहरों की अनूठी पहचान और पारिस्थितिक संतुलन को बचाने के लिए संदर्भ-अनुकूल योजना, सतत विकास के तरीके, संस्थागत समन्वय और जिम्मेदार वास्तुशिल्प (architectural) हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम में इवेंट पार्टनर ‘वेका’ (VEKA) की ओर से एक प्रस्तुति दी गई, IIA हिमाचल प्रदेश चैप्टर की आगामी प्रतियोगिता की घोषणा की गई, और आर्किटेक्ट सुलोचना धीमान ने कविता पाठ किया, जिसमें वास्तुकला के रचनात्मक और मानवीय पहलुओं को उजागर किया गया।
कार्यक्रम का समापन गणमान्य व्यक्तियों के सम्मान, आर्किटेक्ट सुशील शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। इस संकल्प का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में सतत, समावेशी और लचीली बस्तियों के निर्माण में आर्किटेक्ट्स की पेशेवर भूमिका को मजबूत करना था।
यह आयोजन नवनिर्वाचित टीमों के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत रहा। इसने इस संदेश को और पुख्ता किया कि पहाड़ी क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी, विरासत संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों की भलाई का ध्यान रखना भी अनिवार्य है।
