शिमला-10 जुलाई. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला बाईपास फोरलेन निर्माण के दौरान चमियाना में रंजना देवी का मकान गिरने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए NHAI और गावर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर रंजना देवी को कुल 2.23 करोड़ रुपये के मुआवजे का 50-50 प्रतिशत भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला जनहित याचिका के रूप में सामने आया था, जिसकी शुरुआत चंदा देवी द्वारा भेजे गए एक पत्र से हुई थी। चंदा देवी ने शिकायत की थी कि उनके 3.5 मंजिला मकान के साथ स्थित रंजना देवी का घर फोरलेन निर्माण के दौरान गिर गया, जिससे उनका मकान भी असुरक्षित हो गया।
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार रंजना देवी के मकान की कीमत 1,65,17,336 रुपये तथा घरेलू सामान की कीमत 58,38,588 रुपये आंकी गई। इस प्रकार कुल नुकसान 2,23,55,924 रुपये निर्धारित किया गया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी राशि रंजना देवी को दी जानी चाहिए।
खंडपीठ ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जुलाई 2025 में नुकसान का आकलन होने के बावजूद अब तक रंजना देवी को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। कोर्ट ने कहा कि NHAI अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती और निर्माण कार्य से हुए नुकसान के लिए जवाबदेह है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिए हैं कि चंदा देवी के असुरक्षित मकान का मूल्यांकन किया जाए। यह आकलन 8 जून 2022 को गठित राज्य स्तरीय समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा, जो Right of Way से बाहर निजी भूमि और भवनों को हुए नुकसान का मूल्यांकन करती है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि NHAI और M/s गावर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड आदेश की तारीख से चार सप्ताह के भीतर रंजना देवी को मुआवजे की राशि का 50-50 प्रतिशत भुगतान करें। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
