नई दिल्ली-15 सितंबर. केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को 2,000 रुपये तक के यूपीआई (UPI) लेनदेन पर किसी भी प्रकार का ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने से रोक दिया है.
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 की धारा 10A के तहत ये कानूनी प्रतिबंध लागू किया गया है. इस नियम के जरिए 2,000 रुपये तक रुपये डेबिट कार्ड और यूपीआई से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले किसी भी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं वसूला जा सकता. डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुगम बनाए रखने के उद्देश्य से ये कदम उठाया गया है.
अगस्त में सरकार ने एक निश्चित सीमा से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुरू करने की संभावना का संकेत दिया था. इसके साथ ही सरकार ने आश्वस्त किया था कि आम उपभोक्ताओं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (पर्सन-टू-पर्सन) के बीच होने वाले भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे.
सरकार ने कहा था कि इस बदलाव को भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को टिकाऊ, कॉम्पिटिटिव और देश की बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी को सपोर्ट करने में सक्षम बनाने की उसकी बड़ी कोशिश के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए.
वित्त मंत्रालय ने उन खबरों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें प्रस्तावित पॉलिसी बदलावों के पीछे बाहरी प्रभावों का हाथ होने का दावा किया गया था. मंत्रालय ने ऐसे दावों को पूरी तरह निराधार, झूठा और भ्रामक करार दिया. सरकार ने साफ किया कि देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना ही उसका मुख्य टारगेट है.
पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत यह आदेश जारी किया गया है . नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि इसमें पेमेंट करने वाले और भुगतान प्राप्त करने वाले, दोनों से किसी प्रकार का चार्ज वसूलना मना है . यानी ग्राहक से पेमेंट फीस नहीं ली जा सकेगी और कारोबारी या दुकानदार से भी ऐसे भुगतान पर कोई शुल्क नहीं वसूला जा सकेगा .
इस फैसले का सीधा फायदा छोटे दुकानदारों, किराना स्टोर, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों, छोटे कारोबारों और ग्राहकों को मिल सकता है . उदाहरण के लिए मान लीजिए कि अगर कोई ग्राहक UPI के जरिए 800 रुपये का पेमेंट करता है, तो बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहक या दुकानदार से अलग से कोई चार्ज नहीं ले सकेगा. इसी तरह 2,000 रुपये तक की खरीदारी पर RuPay डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर भी पेमेंट से जुड़ा अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जा सकेगा.छोटे कारोबारियों के लिए यह फैसला खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कम मूल्य के डिजिटल भुगतानों पर कोई भी शुल्क उनके मुनाफे पर असर डाल सकता है . सरकार का यह कदम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और छोटे व्यापारियों को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है .
ये तो स्पष्ट हो गया कि बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर 2,000 रुपये की सीमा तक पेमेंट पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा पाएंगे. हालांकि, नोटिफिकेशन में UPI के लिए सीमा 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर लागू बताई गई है. इसलिए 2,000 रुपये से ज्यादा पेमेंट या अन्य कार्ड नेटवर्क के नियमों पर ये आदेश लागू होगा या नहीं, ये संबंधित नियमों और शुल्क संरचना पर निर्भर करेगा.
