शिमला-04 अगस्त. हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष जुलाई का मानसून उम्मीदों से कहीं अधिक सक्रिय रहा। वर्ष 1901 से अब तक के 125 वर्षों के रिकॉर्ड में जुलाई 2026 ने 62वां सबसे अधिक वर्षा वाला जुलाई महीना बनकर नया मुकाम हासिल किया है। पूरे प्रदेश में जुलाई के दौरान 255.9 मिलीमीटर सामान्य वर्षा के मुकाबले 272.5 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से छह प्रतिशत अधिक है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि अलनीनो जैसी वैश्विक मौसमीय परिस्थितियां भी इस बार हिमाचल में मानसून की रफ्तार को थाम नहीं सकीं।
वर्ष 1949 में दर्ज 548.6 मिलीमीटर की ऐतिहासिक जुलाई वर्षा का रिकॉर्ड अब भी कायम है, लेकिन वर्ष 2026 की बारिश ने भी प्रदेश के मौसम इतिहास में अपनी अलग पहचान बना ली है। 125 वर्षों के मौसम इतिहास में दर्ज हुई जुलाई 2026 यह संकेत भी देती है कि वैश्विक स्तर पर अलनीनो जैसी परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश का मानसून अपनी अलग प्रकृति बनाए हुए है।
वर्षा विचलन के आंकड़े भी मानसून के बदलते स्वरूप की कहानी बताते हैं। वर्ष 2015 में जुलाई में पांच प्रतिशत कम, 2016 में 29 प्रतिशत कम, 2017 में 22 प्रतिशत कम, 2018 में 12 प्रतिशत कम, 2019 में 21 प्रतिशत कम और 2020 में 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद 2021 में बारिश पांच प्रतिशत अधिक, 2022 में चार प्रतिशत अधिक और 2023 में रिकॉर्ड 75 प्रतिशत अधिक रही। वर्ष 2024 में फिर 29 प्रतिशत कम तथा 2025 में दो प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई, जबकि 2026 में जुलाई सामान्य से छह प्रतिशत अधिक बारिश के साथ सकारात्मक श्रेणी में लौट आई।
जुलाई के वर्षा आंकड़ों के अनुसार कांगड़ा जिला पूरे प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा वाला जिला रहा, जहां पूरे महीने में 546.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी ओर लाहुल-स्पीति सबसे शुष्क जिला रहा, जहां केवल 74.9 मिलीमीटर वर्षा हुई। यदि वर्षा विचलन की बात करें तो कुल्लू जिला सबसे आगे रहा, जहां सामान्य से 62 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके विपरीत हमीरपुर और लाहुल-स्पीति में सामान्य से 43 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड हुई।
वर्ष 2015 से 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि हिमाचल में मानसून का मिजाज लगातार बदलता रहा है। वर्ष 2023 में रिकॉर्ड 448.9 एमएम बारिश के बाद 2024 में मानसून कमजोर पड़ गया था, लेकिन 2025 और अब 2026 में बारिश ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। जुलाई माह में दर्ज वास्तविक वर्षा के अनुसार वर्ष 2015 में 260.6 एमएम, 2016 में 193.3, 2017 में 213.8, 2018 में 240.1 , 2019 में 215.8, 2020 में 204.0, 2021 में 285.4 , 2022 में 266.2, 2023 में 448.9, 2024 में 181.2 , 2025 में 250.3 तथा वर्ष 2026 में 272.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि रिकॉर्ड वर्ष 2023 को छोड़ दें तो 2026 हाल के वर्षों की सबसे अधिक बारिश वाली जुलाई में शामिल हो गई है।
